Thursday, January 08, 2009

साथ उसके आसमाँ है...

पाया नहीं यह ज्ञान से
समझा नहीं विज्ञान से
यह नहीं कोई कला
जिसको तराशा ध्यान से
संस्कारों से मिली जो
यह तो बस एक भावना है
जिसने दिया विश्वास मुझको
इंसान आता है जगत में
हाथ में क्षमता लिये
कोई शिखर ऎसा नहीं
जिसे वो पा सकता नहीं


आदमी कुछ भी नहीं
उसका पता है वह घड़ी

जिसमें है बीता वक्त उसका
हमे तो बस यह चाहिये
अविरत चली इस श्रंखला की
हम बने सुंदर कड़ी

पंछी नहीं टिकता वहाँ

उड़ना जहाँ वह सीखता है
पर जाता नहीं है वह अकेला
साथ उसके आसमाँ है
अब तो बस यह देखना है
कितना वो इसमें जोड़ता है
अगली कड़ी का आसमाँ

सुंदर वो कितना छोड़ता है

16 comments:

  1. reteshji bahut bdia bhav hain aapke verna aaj ke uvaon ke paas samay kahan bhanayen paalne ka aur vyakt karne kaa bdhaai

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  2. पंछी नहीं टिकता वहाँ
    उड़ना जहाँ वह सीखता है
    पर जाता नहीं है वह अकेला
    साथ उसके आसमाँ है
    अब तो बस यह देखना है


    --बहुत सुन्दर भाव, रीतेश भाई.

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  3. अगली कड़ी का आसमाँ
    सुंदर वो कितना छोड़ता है

    sudar laaine

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  4. ब्लोगिंग की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत है. एक समर्थ और सार्थक अभिव्यक्ति के लिए सिर्फ़ बधाई काफी नहीं होती..... आपका लेखन फले-फूले और आपके शब्दों को नित नए अर्थ और रूप मिलें यही शुभ कामना है.

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  5. इंसान आता है जगत में
    हाथ में क्षमता लिये
    कोई शिखर ऎसा नहीं
    जिसे वो पा सकता नहीं
    ----------
    हमे तो बस यह चाहिये
    अविरत चली इस श्रंखला की
    हम बने सुंदर कड़ी
    ----------
    पंछी नहीं टिकता वहाँ
    उड़ना जहाँ वह सीखता है
    ----
    अगली कड़ी का आसमाँ
    सुंदर वो कितना छोड़ता है
    ---


    बहुत सुन्दर पंक्तियां है और बहुत कुछ कह जाती हैं

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  6. बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  7. वाह ! वाह ! वाह !

    गहन सुंदर भाव और सुंदर मनमोहक अभिव्यक्ति. ऐसे ही लिखते रहें .शुभकामनाये.

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  8. बहुत ही सुंदर और खुबसूरत रचना है आपकी. नव वर्ष की शुभकामनायें. नया साल आपको शुभ हो, मंगलमय हो.

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  9. पर जाता नहीं है वह अकेला
    साथ उसके आसमाँ है
    ... प्रसंशनीय है।

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  10. पंछी नहीं टिकता वहाँ
    उड़ना जहाँ वह सीखता है
    पर जाता नहीं है वह अकेला
    साथ उसके आसमाँ है
    अब तो बस यह देखना है
    कितना वो इसमें जोड़ता है
    अगली कड़ी का आसमाँ
    सुंदर वो कितना छोड़ता है

    bhot sunder bhav.....

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  11. Reetesh Bhai aapne is Rachana ke madyam se bahoot hi gahri baat, bahoot hee aasani se hum sub padane walon ke dilon tak pahuncha dee.
    Aap wakai main Badhaai ke patra hai.

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  12. Zeevan ki gatisheelta aur rachnatmakta par ek sundar shabd chitra.
    badhai.

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  13. सुन्दर ब्लॉग...सुन्दर रचना...बधाई !!
    -----------------------------------
    60 वें गणतंत्र दिवस के पावन-पर्व पर आपको ढेरों शुभकामनायें !! ''शब्द-शिखर'' पर ''लोक चेतना में स्वाधीनता की लय" के माध्यम से इसे महसूस करें और अपनी राय दें !!!

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  14. बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

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  15. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com
    Email- sanjay.kumar940@gmail.com

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आपकी टिप्पणी और उत्साह वर्धन के लिये हार्दिक आभार....