Saturday, January 10, 2015

हर मौसम आम...

अब कोई मौसम खास नहीं
शौक बड़ी है चीज यहाँ
किसी कारण की मोहताज नहीं
हर मौका पीने का मौका
खोलो बोतल जाम
खाईये श्रीमान हर मौसम आम...


धार्मिक होना अब और हुआ आसाँ
बस कहो तुम गर्व से जय-जय श्री राम
खाईये श्रीमान हर मौसम आम...


लगंड़ा, केसर, मल्लिका सब एकरस हो गये
बोतल से पीजिये अब हर तरह का आम
खाईये श्रीमान हर मौसम आम...


होली बेरंग है दिवाली की सेल है
धीरज का साथ नहीं वैभव की रेल है

प्रकृति से दूर हुई उत्सवों की शाम
खाईये श्रीमान हर मौसम आम...

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